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शनिवार, 10 दिसंबर 2022

दिसंबर 10, 2022

Horror Stories in Hindi : छलावा भूत की कहानी || Hindi Stories Blog

 




छलावा भूत की कहानी (Chalawa Bhoot)


छलावा भूत की कहानी (Chalawa Bhoot) Horror Story: यह कहानी एक लड़के के एक छलावा भूत से हुवे सामने के बारे में है. एक दिन उसका सामना एक छलावे से हो जाता है।

यह कहानी तब की है जब मैं अपनी मौसी के घर छुट्टियाँ बिताने गया हुआ था। उस समय मेरी गर्मी की छुट्टियाँ चल रही थी।

मेरे मौसा जी एक डॉक्टर है तो उन्हें रहने के लिए एक क्वाटर मिला हुआ था। वे उस क्वाटर में दूसरे मंजिल पर रहते थे। उनके फ्लोर पर एक बालकनी थी जिसके पीछे की ओर एक जंगल था और रात के समय उस जंगल से अज़ीबोगरीब आवाजे सुनाई देती थी।


ऐसे ही, एक दिन की बात है जब हम सभी खाना खाकर रात में बालकनी में बैठे बातें कर रहे थे कि तभी मेरी मौसी का लड़का हमसे कहने लगा कि किसी में इतनी हिम्मत है कि वो रात के इस समय में इस जंगल के अंदर जाये।


हम सभी हँसने लगे और उससे कहने लगे कि क्या फ़ालतू की बात कह रहा है। भला, कोई इस जंगल में इतनी रात में क्यों जायेगा। कहीं कोई जंगली जानवर मिल गया तो शामत पक्की है। (हाहाहा…. सब हँसने लगे।)


वो बोला कि मैं मज़ाक नहीं कर रहा हूँ। मेरे स्कूल के दोस्त बताते है कि एक बार ऐसे ही एक लड़का उस जंगल में चला गया फिर उसका कभी कुछ पता नहीं चला।

गाँव के लोग बताते है कि उस लड़के को अपने पिता के जंगल में बुलाने की आवाज़ आई थी और वो उनकी आवाज के पीछे-पीछे उस जंगल में चला गया और फिर कभी किसी ने उसे नहीं देखा।


मैं हँसने लगा कि यह तो झूठी कहानी है। अगर वो लड़का लौटा ही नहीं तो लोगों को किसने बताया कि वह आवाज़ उसके पिता की थी।


वो बोला “क्योंकि उसके पिता उससे थोड़ी दुरी पर थे और उन्होंने भी वहीँ आवाज सुनी थी मतलब उनकों बुलाने की। उनकी ही आवाज में कोई उनके बेटे को अपनी ओर पुकार रहा था।”


जब वे दौड़कर वहाँ पहुँचे तो उन्होंने देखा कि वहाँ पर उनका बेटा नहीं था।


इसलिए कोई भी उस जंगल की ओर नहीं जाता

आप पढ़ रहे है छलावा भूत की कहानी (Chalawa Bhoot)


मैं अपने मौसेरे भाई की यह कहानी सुनकर हंसने लगा कि वाह क्या बात है। जंगल का भूत जो लोगों को गायब कर दे। हाहाहा….


फिर हम सभी उठकर टीवी देखने लगे और थोड़ी देर बाद में उस बालकनी में जाकर थोड़ी फ्रेश हवा खाने लगा। रात का समय में, उस जग़ह अच्छी-खासी हवा चल रही थी और मैं उस जंगल की ओर मुँह करके देखने लगा कि आखिर कौन होगा वो? क्या वो सच था की तभी मैंने अपने मौसेरे भाई को उस जंगल के किनारे खड़े देखा।


वो मेरी ओर नज़र करके हँस रहा था और मुझसे इशारे में कह रहा था कि तुम भी यहाँ आओ। मैं चौक गया कि अभी तो वो टीवी देख रहा था फिर नीचे कैसे पहुँच गया?


मैंने पीछे मुड़कर देखा वहाँ वो नहीं था तो मुझे लगा कि शायद ये नीचे चला गया है और मुझे भी नीचे बुला रहा है। वो अब मुझसे बोला कि अरे! देख क्या रहे हो नीचे आओ। थोड़ा सैर करते है।


मैंने सोचा चलो! थोड़ा घूम ले तो मैं नीचे जाने के लिए दरवाज़े तक गया ही था कि तभी मैंने देखा कि मेरा भाई तो टॉयलेट करके बाहर आया है।


यह देखकर मैं सकपका गया। मेरे रौंगटे खड़े हो गये और मैं बस यहीं सोच रहा था कि अगर ये यहाँ है तो वहाँ नीचे कौन है?


मैं उससे बोला कि तुम तो नीचे थे। इस बाथरूम में कब आये।


वो बोला कि मैं तो यहीं था। मैं तो बाथरूम गया ही नहीं हूँ। तुम क्या बोल रहे हो।


मैं उससे बोला कि मैंने अभी-अभी तुम्हें उस जंगल के किनारे देखा था और तुम तो मुझे बुला भी रहे थे।


वो बोला मजाक मत करो। तुम्हें क्या लगता है? मैं डर जाऊंगा। मुझे पता है कि तुम मुझे डराने का प्रयास कर रहे हो। पर मैं नहीं डरने वाला। इतना कहकर वो टीवी देखने चला गया।


मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि ये मैंने अभी क्या देखा है?


उसी रात मैं जब सो रहा था तब किसी की मुझे पुकारने की आवाज आ रही थी।


वो जो भी था मुझसे कह रहा था कि मैं तुम्हारा कब से इंतज़ार कर रहा हूँ, तुम तो आये ही नहीं। देखो जल्दी आ जाओ। फिर हम दोनों साथ में इस जंगल के अंदर घूमेंगे।


इस बार यह आवाज मेरे भाई जैसी नहीं थी बल्कि किसी ऐसे बूढ़े आदमी की थी जो काफी लम्बा होगा और बहुत ज्यादा सिगरेट पीता होगा। रात भर मुझे उसकी आवाजे आने लगी और फिर जब सुबह मैंने सबको यह बात बताई तो सबने मुझसे कहा कि ऐसा होना यहाँ आम बात है।


तुम उस ओर ध्यान मत दो और अपना काम करो और भूल कर भी उस जंगल की ओर मत जाना।


उसके कुछ दिनों बाद भी मुझे उस जंगल की ओर से आवाजें आती रही। फिर वो आवाजें आना रुक गयी। इस घटना के कुछ दिनों बाद मेरे पापा मुझे लेने आ गये थे क्योंकि मेरी गर्मी की छुट्टियाँ भी ख़त्म होने वाली थी।


उस जंगल में रहने वाले को लोग छलावा कहते है और जो कोई भी उसके पीछे जाता है वो फिर कभी लौट कर नहीं आता।


So I hope Guys आपको यह Horror Story अच्छी लगी होगी।


पढ़ने के लिए धन्यवाद।


Hindi Stories Yatin.

गुरुवार, 21 अक्टूबर 2021

अक्टूबर 21, 2021

Horror Stories in Hindi - रात के अंधेरे में डराता सन्नाटो का शोर || Hindi Stories Blog

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Hello दोस्तो मैं यतिन आपके लिए एक नई स्टोरी लेकर आया हूं||


रात के अंधेरे में डराता सन्नाटो का शोर


जैसलमेर शहर से 15 किलोमीटर दूरी पर स्थित एक ऐसा गांव जिसमें अब कोई रहना नहीं चाहता. लोग कहते हैं उस गांव में भूतों और आत्माओं का डेरा है. कहा तो यह भी जाता है कि उस गांव में फैली दहशत के पीछे जो कहानी है वह उससे भी ज्यादा भयानक और खतरनाक है. जिसकी बुरी नजर की वजह से जो भी उस गांव में आता है वह अकाल मौत का शिकार बन जाता है.

यूं तो हम सभी ने कभी ना कभी भूत-प्रेत पिशाचों से जुड़ी कहानियों को पढ़ा या सुना होगा. हो सकता है कुछ ने ऐसी पारलौकिक शक्तियों का सामना भी किया हो लेकिन जो कहानी हम यहां आपको सुनाने जा रहे हैं वह थोड़ी अविश्वस्नीय जरूर है लेकिन स्थानीय लोगों के लिए वह एक बेहद खौफनाक सच है जिसका सामना उन्हें अकसर या कहें शायद रोज ही करना पड़ता है.

मरने के बाद भी जिन्दा है वो

कुलधरा, जैसलमेर से 15 किलोमीटर दूरी पर स्थित एक गांव अपनी दहशत के लिए आसपास कुख्यात बन गया है. आपको यह बात तो पता ही होगी कि जिन स्थानों को पारलौकिक ताकते अपने कब्जे में ले लेती हैं उन स्थानों पर बसने वाले लोग या तो स्वयं उस स्थान को छोड़ कर चले जाते हैं और अगर नहीं जाते तो उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है. कुलधरा भी ऐसा ही एक गांव है जहां पहले ब्राह्मण समुदाय का वास था. ऐसा माना जाता है कि सन 1825 में इस गांव में रहने वाले पालीवाल ब्राह्मण और आसपास के 84 गांवों के लोग रातोंरात अपना घर छोड़कर चले गए थे. सन 1300 से इस गांव में पालीवाल ब्राह्मण की पीढ़ियां रहा करती थी और रक्षाबंधन के एक दिन सभी इस गांव को छोड़कर चले गए. ऐसा माना जाता है इस दिन कुछ ऐसा दर्दनाक घटा था जिसके बाद आज तक भी बहुत से पालीवाल ब्राह्मण रक्षाबंधन का त्यौहार नहीं मनाते.

मौत से छीनकर अपनी जिंदगी दुबारा वापस लाई बड़े पैमाने

पर हुए इस पलायन के पीछे की कहानी कुछ यह कहती है.

जैसलमेर के दीवान सलीम सिंह को कुलधरा समेत 84 गांवों के मुखिया की खूबसूरत बेटी से प्यार हो गया था. सलीम सिंह ने गांव के लोगों को यह धमकी दी थी कि अगर उसका विवाह उस लड़की के साथ ना हुआ तो वह करों में और ज्यादा वृद्धि कर देगा. ऐसे हालातों में गांव के मुखिया ने उस स्थान को छोड़कर जाने का निश्चय कर लिया और अपने पीछे यह श्राप छोड़ गए कि जो भी उनके जाने के बाद इस गांव में रहेगा या बसने की कोशिश करेगा वह अपनी जान से हाथ धो देगा. मुखिया और उसकी के जाने के बाद गांव के बहुत से लोग धीरे-धीरे कर के बीमार पड़ने लगे या फिर अकारण ही मृत्यु के ग्रास बनते गए. इस घटना के बाद कुलधरा और आसपास के 84 गांव के लोगों ने अपना-अपना घर छोड़ दिया और तब से लेकर अब तक कोई भी उस गांव में बसने की हिम्मत नहीं जुटा पाया है.


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रविवार, 17 अक्टूबर 2021

अक्टूबर 17, 2021

Horror Story in Hindi - परेशान आत्मा || Hindi Stories Blog


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हेल्लो दोस्तों मैं अजय आप लोगो के लिए एक और कहानी ले के आया हूँ जो कि एक परेशान आत्मा की है! यह कहानी एक गांव की है जिसका नाम है कोलागढ़ कोलागढ़ का जंगल बहुत भयानक है! उस जंगल मैं भूतों प्रेतों का का ज्यादा डर था! वहां के लोगो का मानना था कि आत्माए भूत- प्रेत होते हैं!उन्होंने भी इस बात पर तब यकीन किया जब उन्होंने यह सब अपनी आखों से देखा! उस गाँव मैं एक औरत थी उसका दिमाग कुछ ठीक नहीं था उसका पति भी एक एक्सीडेंटमैं मर गया था तब से वह कुछ अजीब सी हो गयी थी कुछ लोग उसे पागल कहते थे!एक बार की बात थी की सुबह-सुबह गांव का एक आदमी जिसका नाम भोला राम था! वह शहर की और कुछ ज़रूरी काम से निकल पड़ा गांव के आने जाने का एक ही रास्ता था वह भी जंगल से गुजरता था!इसलिए लोग उसमें अँधेरे मैं डर के मारे नहीं जाते थे और शाम होते ही कोई जंगल की तरफ नहीं जाता था!भोला राम जब उस जंगल से जा रहा था गांव से कुछ दूर ही जंगल मैं उसे एक औरत की लाश पेड़ पर लटकती नज़र आई वह एक दम डर गया और भागता हुआ गांव वापस आया! कुछ लोगो ने उसे इस तरह से भागते देख कहा क्या हुआ भोला राम तुम तो अभी शहर के लिए निकले थे और तुम भागते हुए वापस क्योँ आ गए! तब भोला राम ने बताया कि मैंने अभी किसी की लाश को पेड़ पर लटकते देखा वह लाश किसी औरत की है! देखते-देखते सारा गांव इकट्ठा हो गया कि क्या हो गया कहाँ है लाश चलो चलकर देखते हैं! तब सारा गांव उसे देखने को चल दिया देखते क्या हैं कि एक औरत की लाश पेड़ पर लटक रही है! देखते ही गांव वालों ने कहा कि यह तो पागल लग रही है!कुछ लोगों ने कहा इसे नीचे उतारो और इसका दाह संस्कार कर दो कुछ लोगो ने कहा छोड़ो इसका है ही कौन जो इसे आग देगा वेसे भी इससे सारा गांव परेशान हो गया था चलो इससे तो पीछा छूटा! कुछ बूढ़े लोगों ने कहा कि ऐसा नहीं कहते शरीर का दाह संस्कार करना ज़रूरी होता हे नहीं तो उसकी आत्मा भटकती रहती है! तो कुछ लोगों ने कहा कि तो जा कर उतार ले उसे और करदे दाह संस्कार बड़े आये सुझाव देने वाले वेसे भी इस जंगल मैं आत्माओ की कमी नहीं है और एक और आत्मा सही चलो धीरे धीरे सारे लोग चलते बने दोस्तों आठ दस दिन तक वह लाश ऐसे ही पेड़ पर लटकती रही किसी ने उसे उतारा तक नहीं !एक दिन अचानक उस लाश की रस्सी टूटकर पेड़ों पर अटक गयी और पत्तो से छुप गयी!समय बीतता गया एक दिन गाँव का हरिया नाम का व्यक्ति उस राते से जा रहा था कि उसे वही पागल सामने दिखाई दी वह एक दम डर गया उसका सारा शरीर कांपने लगा और उसके पलक झपकते ही वह गायब हो गयी हरिये ने सोचा कि मैं तो मन मैं ऐसे ही सोच रहा था! और वह आगे चल दिया तभी एक दम उसकी और एक सांड दोड़ते हुए आया और उसे जोर से टक्कर मार के चला गया हरिया उल्टा गिरा उसके बहुत जोर से चोट आई उसने जैसे ही पीछे मुड के देखा तो कोई नहीं उसने जैसे ही फिर आगे को देखा तो उसके आगे एक औरत कड़ी हो गयी वह एक दम डर गया और कांपने लगा उसकी शक्ल तो ऐसी थी कि तरफ गाल की हड्डियाँ और एक तरफ जला हुआ सा चेहरा आंखें अन्दर धंसी हुई नाख़ून बड़े बड़े वह उसे देखकर ऐसा डरा कि वह बेहोश होके गिर पड़ा उसकी आंखें खुली तो वह एक दम डर गया उसने अपने आप को घने जंगलों के बीचो बीच पाया उसके पेट मैं तो पानी हो गया चरों तरफ से आवाजें आ रही थी कहीं पत्तों मैं खर खर की आवाजें तो कहीं शेर के धहड़ने की आवाजें वह इतना डर हुआ था कि उसे तो भागना ही नहीं आ रहा था वह वहां से धीरे धीरे डरता हुआ जंगल मैं से भटकता हुआ बाहर आया उसे जंगल से निकलते-निकलते अँधेरा हो गया था वो अब और डर रहा था कि पहले तो एक भूत था पर अब ना जाने कितनो से पला पड़ेगा पता नहीं आज मैं यहाँ से जिन्दा निकलूंगा कि नहीं उसके मन मैं अजीब अजीब से ख्याल आ रहे थे वह भागता ही चला जा रहा था भागते भागते वो जाने कैसे उस जंगल से बाहर निकल के आया उसे इस हालत मैं देख कुछ लोगो ने उससे पुछा कि इतनी रात को कहाँ से आ रहे हो तुम्हें डर नही लगता क्या उसने कुछ भी जवाब नहीं दिया उसे विश्वाश नहीं हो रहा था कि मैं गांव मैं जिन्दा आ गया हूँ उसकी हालत देखकर कह रहे थे कि इस हरिया को क्या हो गया है!वह घर पहुंचा और जाकर कि ओढ़ कर सो गया उसकी औरत ने उसे खाना खाने के लिए कहा पर उसने कुछ जवाब नहीं दिया! उसने रत को एक सपना देखा और उस सपने मैं उसी परेशान आत्मा को देखा वह उससे रो रो कर कह रही थी मुझे बचालो मुझे इस नरक से बचा लो यह लोग मुझे मार डालेंगे ऐसा सपना देख कर वह उठ खड़ा हुआ उसके पशीना निकल आया था और वह यह सोच रहा था कि यह सब मेरे साथ क्योँ हो रहा है! सुबह हो गयी लेकिन हरिया नहीं जगा तब उसकी पत्नी ने उसे जगाने के हाथ लगाया तो उसे उसके चहरे मैं उसी का चहरा दिखा वह चिल्ला पड़ा तब उसकी ने कहा क्या हुआ तुम शाम से कुछ अजीब से डरे हुए लग रहे हो न शाम को खाना खाया तुम्हें आखिर हुआ क्या है! मुझे बताओ तब उसने सारी बात बतायी ! तब वह जा कर समझी कि आप तभी परेशान हो!धीरे-धीरे यह बात सारी गांव मैं फेल गयी कि वह पागल औरत भूत बन गयी है! तभी कुछ लोगों ने बताया कि रात को यही आवाज कुछ लोगो ने सुनी जो जंगल से आ रही थी कि मुझे बचाओ मुझे इस नरक से निकालो अब तो सारे लोग परेशान थे कि शहर का जाने का रास्ता भी बंद हो गया अब हम लोग क्या करैं !तब कुछ लोगों ने कहा कि हम लोगों को किसी महान आदमी की सलाह लेनी होगी कि यह सब मांजरा क्या है! तब किसी एक आदमी ने कहा कि पास के गांव मैं नत्थीलाल भगत जी रहते हैं! वह आत्माओं के बारे मैं बहुत कुछ जानते हैं!जब सुखिया के लड़के को एक आत्मा ने पकड़ लिया था तब उन्ही ने उस आत्मा से उसे छुड़ाया था!तब कुछ लोगों ने कहा यही ठीक रहेगा! सब लोगों ने उस भगत जी को गांव मैं बुलाया और उन्हें साड़ी घटना बता दी भगत जी ने कहा कि तुमने उसके शरीर को न जला कर बहुत बड़ी गलती कर दी चाहे वो कैसी भी थी इतना बड़ा जंगल हो के भी तुम लोगों से चार लकड़ियों का बंदोबस्त नहीं हो पाया था! इन्शान कैसा भी हो जब वह मर जाता है तो उसका दुश्मन भी उसकी अर्थी को कन्धा देने को आ ही जाता है! पर तुमने तो सारी सीमायें तोड़ दी चलो अब जो भी हो गया है उससे निपटने के लिए अब तैयारी करो! तब भगत जी ने हवन किया और अपना ध्यान लगा के देखा तो उसे वह आत्मा बंधी हुई नज़र आई तब पंडित जी ने उसे पुछा कि तुम्हें यहाँ किसने बांध रखा है तब उसने कहा कि मुझे एक दरिन्दे ने बाँध रखा है पहले उसने मुझे मार के पेड़ पर लटका दिया था!फिर गांव वालों ने मेरे शरीर का अंतिम संस्कार भी नहीं किया! मेरे शरीर को उसने कहीं छुपा के रख दिया है इसने मेरी आत्मा को कैद कर लिया है!जब तक मुझे मुक्ति नहीं मिलेगी इससे जब तक मेरे शरीर का अंतिम संस्कार नहीं हो जाता मैंने हरिया को भी यह बात बतानी चाही जब तक मैं उसे कुछ बताती पर उससे पहले उस वहसी दरिन्दे ने उसे चोट पहुंचा कर बेहोश कर दिया था तब मैंने उसे उससे बचा लिया था!तब पंडित जी सब समझ गए और कहा कि तुम चिंता मत करो मैं तुम्हें अवश्य मुक्ति दिलाऊँगा! तब भगत जी ने आखें खोली तब उन्होंने कहा चलो मुझे उस पेड़ के पास ले चलो जहाँ वह मरी थी! पंडित जी ने कहा की जिस तरीके से अंतिम संस्कार करते है वह सारा सामान ले चलो तब गांव वाले सारा सामान लेकर चल दिए पंडित जी आगे आगे और गांव वाले पीछे-पीछे उन्होंने देखा की वह पेड़ तो बहुत बड़ा हो गया है वह बहुत घना हो गया है और लाश का कुछ भी अता पता नहीं है! न हीं उसकी हड्डियों का तब पंडित जी ने कहा की सारे लोग ऊपर चढ़ के ढूँढो हमें यह काम शाम होने से पहले करना है! तब सारे लोग उस पेड़ पर चढ़ कर उस लाश को ढूँढने लगे बहुत देर तक वह लाश नहीं मिली सारे लोग सोचने लगे लाश गयी तो गयी कहाँ न हड्डियों क पता कहा गयी एक भी हड्डी नहीं मिली तब पंडित जी ने नीबू दे दिया सबको और कहा जहाँ यह नीबू लाल हो जाये समझना वहीँ पर लाश है!दो तीन मिनट बाद एक आदमी ने कहा यह रही लाश यह तो हड्डियों का ढांचा है! उसका इतना कहते ही सारे लोग चीखने लगे भूत भूत उनके सामने एक भयानक आदमी खड़ा है उसके यह बड़े-बड़े दांत आंखें लाल-लाल मुंह भेडिये जैसा ये बड़े नाखून लोग डर के मारे ऊपर से कूद गए एक को तो उस भेडिये ने ऐसा पकड़ के फेंका की वह सीधा नीचे आ के गिरा हा हा हा हा चिल्लाने लगा कोई नहीं ले जाएगा इसे यह मेरी है इसे मैंने वर्षों से सजा के रखा है उसने गुस्से मैं सारा पैड झकझोर दिया ऐसा होते देख पंडित जी ने मंत्र पढना शुरू किया पंडित जी को मंत्र पढ़ते देख उसने उन पर हमला बोल दिया पंडित जी को उठा कर फेंक दिया पर पंडित जी के मंत्र बंद नहीं हुए उन्होंने जो मंत्र पढ़ पढ़ के उसके ऊपर मिटटी फेंकी उसके शरीर पर जहाँ जहाँ मिटटी पड़ी उसका शरीर वहीँ से गलता जा रहा था उसका एक हाथ टूट कर गिरा वह पंडित जी के ऊपर ऐसा झपटा पंडित जी उस जगह से हट गए और वह नीचे जा गिरा पंडित जी ने फिर मंत्र पढ़ के उसके शरीर पर मारा वह वहीँ ढेर हो गया! उसकी आत्मा निकल के एक गांव वाले के अन्दर घुश गयी उसने गांव वालों को ही मारना शुरू कर दिया उसने तो एक का शिर फाड़ दिया और एक का हाथ चबा गया इतना खतरनाक होता जा रहा था उधर शाम होती जा रही थी तब पंडित जी ने उसकी और रस्सी फेंकीऔर दूसरी और एक आदमी ने पकड़ के उसे एक पेड़ से बांध दिया और उसको दो चार मंत्र पढ़ के मारे और लोगों से कहा शाम होने वाली है इससे पहले यहाँ और आत्माएं आये पहले उस शव को नीचे उतारो और उसका अंतिम संस्कार कर दो तब कुछ लोगों ने उसे उसे उठाकर लकड़ियों पर लिटा करा आग लगा दी वह पेड़ से बंधा हुआ चिल्लाए जा रहा था मत जलाओ उसे मत जलाओ उसे देखते देखते वह हड्डियाँ राख मैं परवर्तित हो गयी उसमें से एक ज्वाला उठती उई बाहर आई और पंडित जी को नमस्कार किया और कहा कि अगर इसको मारना हे तो उसके पहले वाले शरीर को जला दो तब वह खुद उसके शरीर से निकल जाएगा ऐसा कहते हुए वह आग का गोला बनकर आकश कि ओर चली गयी तब पंडित जी ने देर न करते हुए उसके शरीर को भी जला दिया तब वह फिर चिल्लाया मुझे मत जलाओ मुझे मत जलाओ तब तक आग उसके शरीर को जला चुकी थी!ओर उसकी आत्मा उस गांव वाले के शरीर से निकल कर आकाश मैं चली गयी तब उस आदमी को रस्सी से छोड़ दिया! तब उसका शरीर होश मैं आया! तब सब लोग उसे लेकर गांव आये तब सबने भगत जी को राम-राम कहा ओर भगत जी अपने गांव चले गए तब से उस गांव शांति आ गयी!

Story By Hindi Stories Blog

शनिवार, 12 जून 2021

जून 12, 2021

Horror Story in Hindi - रेल की पटरियों पर ||Hindi Stories Blog

 


दिल्ली से उत्तर प्रदेश के अपने पैतृक निवास लौट रहे थे। ट्रेन काफी लेट हो चुकी थी। वे अपने स्टेशन पर उतरे तो रात के डेढ़ बज चुके थे।

छोटे स्टेशनों पर देर रात को सवारी मिलने में दिक्कत होती है। फिर राकेश का घर शहर के बाहर पड़ता था इसलिए वे रेलवे लाइन के किनारे-किनारे चलने लगे। जैसे ही वे प्लेटफार्म छोड़कर पटरियों के किनारे आए उन्होंने एक युवती को साथ चलते देखा। उन्होंने पूछा तो उसने बताया कि वह हास्टल से घर आ रही थी ट्रेन लेट होने के कारण परेशानी में पड़ गई। इत्तेफाक से उसका घर उस गुमटी के पास ही था जहां से राकेश के घर का रास्ता निकलता था। उसने कहा कि ठीक है उसे घर पहुंचा कर ही वह आगे बढ़ेगा। उसने बताया कि वह इंटर में पढ़ती है और उसके पिता का नाम अर्जुन सिंह है। उसने पूछा कि क्या आप बैडमिंटन खेलते हैं। राकेश ने कहा-हां, खेलता हूं। उसने बताया कि वह टूर्नामेंट में उसे खेलते हुए देख चुकी है।

 रेल लाइन के एक तरफ खेत थे। दूसरी तरफ छिटपुट आबादी। कुछ घर अभी बन ही रहे थे। कुछ घरों से रौशनी आ रही थी। उसके साथ बात करते हुए कब हम रेल फाटक के पास पहुंच गए पता ही नहीं चला। उसने इशारे से राकेश को अपना घर दिखाते हुए कहा कि अब वह चली जायेगी। राकेश ने कहा कि उसे घर तक पहुंचा कर आगे बढ़ेगा। लेकिन उसने कहा अब कोई परेशानी नहीं। अंततः राकेश ने कहा कि वह घर पहुंचने के बाद आवाज़ देगी तभी वह आगे बढ़ेगा। बहरहाल उसने अपने दरवाजे पर पहुंचने के बाद आवाज़ दी। वह अपने रास्ते चल पड़ा।

दो चार दिन बाद राकेश शहर की ओर निकला तो उसके घर के पास से गुजरते हुए उसे लड़की की याद आई। उसने पास के एक दुकानदार से पूछा कि अर्जुन सिंह जी का घर कौन सा है। उसने एक घर की ओर इशारा करते हुए बताया कि गेट के पास जो टहल रहे हैं वही अर्जुन सिंह हैं।

राकेश उनके पास गया और कहा-नमस्ते अंकल।

वे राकेश को पहचानने की कोशिश करने लगे। राकेश ने कहा-अंकल तीन चार दिन पहले मैं रात को स्टेशन से रेलवे लाइन होकर आ रहा था तो आपकी बेटी रेखा मेरे साथ आई थी। अब वह कैसी है। अर्जुन सिंह राकेश की बातें खामोशी से सुनते रहे फिर उसे अंदर आने का इशारा किया। हम ड्राइंग रूम में बैठे ही थे कि एक लड़की ट्रे में बिस्किट और पानी रख गई। अर्जुन सिंह ने बताया कि वह उनकी छोटी बेटी शविता है। राकेश ने पूछा-रेखा कहां है। इसपर अर्जुन सिंह ने दीवार की ओर इशारा किया। वहां रेखा की तस्वीर टंगी थी िजसपर माला पहनाया हुआ था। मैं चौंका। अर्जुन सिंह ने बतलायाः दो महीने पहले की बात है। रेखा ट्रेन से से उतरकर रेलवे लाइन से होते हुए पैदल आ रही थी। पीछे से दो भैंसे दौड़ती हुई आईं कुछ लोगों ने शोर मचाया तो रेखा ने पीछे मुड़कर देखा। उनसे बचने के लिए वह रेलवे लाइन पर दौड़ गई। उसी वक्त एक ट्रेन आ रही थी जिससे वह कटकर मर गई।

 यह कहते-कहते उनकी आंखें डबडबा गईं। फिर थोड़ा संयत होकर पूछा-रेखा बहुत हा हंसमुख लड़की थी. हमारे घर की रौनक थी। पढ़ने में बहुत तेज़ थी। अच्छा बताओ वह तुमसे मिली तो  उदास नहीं लग रही थी न...राकेश ने कहा कि वह सामान्य छात्रा की तरह बात कर रही थी। कहीं से ऐसा नहीं लगा कि...राकेश धीरे से उठा और बोला-अच्छा अंकल चलता हूं।

अर्जुन सिंह ने कहा-ठीक है बेटे आते रहना। राकेश भावुकता में बहता हुआ बाहर निकला। उसकी आंखों के सामने रेखा का चेहरा नाच रहा था।

शुक्रवार, 4 जून 2021

जून 04, 2021

Horror Story in Hindi - अमावस की रात || Hindi Stories Blog



 वह रात थी अमावस की रात यह सोचकर तुम्हारे रोंगटे खड़े हो जायेंगे कि कहानी पढ़ते वक़्त पीछे मत देखना वरना खतरनाक हो सकता है पीछे भूत भी हो सकता है!!सोच लो देखना मत! देखोगे तो र जाओगे मत देखो मत देखो मत देखो चुपचाप कहानी पढ़ते रहो देखो कहा था देखना मत देख लिया न कुछ भी तो नहीं था! मगर डरे ना इसी तरह के भय को ही तो डर कहते हैं!डर एक ऐसी चीज बनाई है भगवान् ने कि पूछो मत बस हम लोग डर-डर के जीते जा रहे हैं जीते जा रहे हैं जाने कब यह डर ख़तम होगा शायद मरने के बाद क्योंकि मरने के बाद तो सारे डर ख़तम खल्लाश हो जाते हैं!देखो यह सब बकवाश है !बहुत हो गयी यह डर की बाते कहानी पढो चलो डर तो अभी लगेगा जब कहानी पढोगे! 

एक समय की बात है अकाल गढ़ मैं कभी भी अकाल नहीं पड़ा था तब भी इसका नाम अकाल गढ़ था!और अकाल अब पड़ता है तब भी इस गांव का नाम अकाल गढ़ है!इस गांव के अकाल पड़ने की भी एक कहानी है! सुनाऊ क्या नहीं अरे नहीं सुनाऊंगा तो तुम्हें क्या घंटा समझ मैं आयेगी! चलो अब असली बात पर आते हैं!अकाल गढ़ मैं दो भाई नीरज और राजू अपनी बीवी के साथ बढ़िया रहा करते थे! राजू और नीरज मैं अच्छी बनती थी! नीरज का विवाह नहीं हुआ था! पर होने वाला था! कुछ दिनों बाद नीरज की भी शादी हो गयी! कुछ दिनों तक तो ठीक ठाक चलता रहा! पर उनकी बीवियों मैं आपस मैं नहीं बनती थी!तो उन्होंने अलग-अलग रहने का फेसला किया दोनों अलग-अलग रहने लगे राजू अलग होने पर बहुत कामचोर हो गया था!पहले वह भाई नीरज के साथ थोडा बहुत काम काज कर लिया करता था !

वह दिन दिन और काम चोर होता गया और उसकी आर्थिक स्थिति ख़राब हो गयी और नीरज अपना काम काज सही करता रहा उसने अपनी मेहनत से काफी अनाज खेत से उगाया यह सब देख-देख कर उसका भाई राजू बहुत जलता था! पर नीरज अपनी तरफ से सही था एक दिन राजू और उसकी पत्नी ने मिलकर नीरज की पत्नी को रात मैं मार दिया नीरज किसी काम से बाहर गया हुआ था!दोस्तों वह रात अमावश्या की रात थी!चाँद अपनी पूरी रौशनी पर था तारे टिम-टिमा रहे थे!रात बिलकुल शांत थी उन्होंने पहले उन दोनों ने उसके घर कूदकर पहले सारा अनाज चुरा लिया जब नीरज की पत्नी को पता चला कि उसके अनाज कि कोई चोरी कर रहा है तब उसने उठकर देखा तो राजू और उसकी बीवी अनाज चुराने मैं लगे थे!तब नीरज कि बीवी ने कहा कि आप यह क्या कर रहे हो अपने ही घर मैं चोरी यह सुनकर राजू और उसकी बीवी ने सोचा कि अगर इसने गांव वालों को बता दिया तो वो लोग हमे गांव से ही निकाल देंगे इस डर के मारे उन्होंने उसकी पत्नी को मार डाला और दूर जंगल मैं गाढ़ के आ गए!सुबह जब नीरज घर पहुंचा तो देखा की उसका अनाज नहीं हैं थोडा बहुत बचा था वह बिखरा पड़ा था!

 जब उसने अपनी पत्नी को आवाज लगायी पर कोई जवाब नहीं आया उसने सारे घर को छान डाला पर वो कहीं नहीं मिली फिर उसने अपनी भाभी से पूछा कि मेरी बीवी कहाँ गयी तो उसने हडबडा के बोला मुझे नहीं पता कल शाम तक तो घर पर ही थी इतना पूछ कर उसने पड़ोसियों से पूछा तो किसी ने कहा पता नहीं और किसी ने बताया शाम तक तो घर पर ही थी वो बहुत घबरा गया और कुछ लोगों को बताया कि घर का सारा अनाज किसी ने चुरा लिया है और मेरी बीवी का भी पता नहीं है कि कहाँ हे वो उसने घर जाके फिर देखा तो उसे उन गेंहू से एक चाक़ू मिला और कुछ खून भी पड़ा था उसे सब कुछ समझ मैं आ गया कि उसे किसी ने मार के सारा अनाज चुरा लिया है!तब उसने अपनी छत पर जाकर देखा तो उसे कुछ अनाज भी गिरा मिला तो उसे अपने भाई राजू पर शक हुआ पर नीरज वैसे भी अपने भाई राजू कि बहुत इज्जत करता था इसलिए उसने कुछ कहा नहीं! तब एक दिन राजू ने कहा कि तू अकेला मत रह हमारे साथ ही आजा हम साथ ही रहेंगे वह राजू को मना तो नहीं कर सकता इसलिए वह उसके साथ मन मार के रहने लगा! 

गांव के कुछ लोग उसकी बीवी को गंदी औरत कहने लगे और कहते थे कि सारा अनाज लेकर भाग गयी बेचारा नीरज अकेला रह गया चुड़ैल कहीं कि यह सब बातें उसे सुनने को मिल रही थी! वह बेचारा क्या करता अपने भाई को कुछ नहीं कह सकता था!एक दिन कि बात है गांव के कुछ लोग जंगल से लकड़ी लेने गए थे! तो वे लकड़ी काट ही रहे थे तब उन्हें किसी स्त्री के रोने कि आवाज सुनाई दी तो उन्होंने कहा कि इस जंगल मैं कौन रो रहा है कहीं कोई रास्ता तो नहीं भटक गया तो वो लोग जिधर से आवाज आ रही थी उसी तरफ चल दिए कुछ दूर चलकर उन्होंने देखा कि एक औरत एक पेड़ के नीचे बेठ कर रो रही है!

जबतक वो उसके पास पहुंचते वह गायब हो गयी! उन लोगों ने जब इस तरह का द्रश्य देखा तो वो घबरा गए उनके तो पसीने छूटने लगे तब एक आवाज आई की अब तुम लोग कभी भी इस जंगल से लकड़ी नहीं काटोगे और जो भी यहाँ लकड़ी काटने आएगा वो जिन्दा वापस नहीं जायेगा और तुम लोग मुझे चुड़ैल कहते हो न तो चुड़ैल सही आज से तुम्हारे गांव मैं कभी पानी नहीं बरसेगा तुम लोग भूखे मरोगे यहाँ सिर्फ अकाल पड़ेगा और अमावाश की रात एक लाश तुम्हारे गांव मैं ज़रूर मिलगी जाओ तुम सब गांव वालों को जा कर बता दो आज से तीन दिन बाद अमावस्या है! 

एक आदमी की मौत ज़रूर है!जिसने भी मुझे मारा है वो बचेगा नहीं मेरा अनाज खा कर के मुझे चुड़ैल कहते हो गांव वालो मैं तुम्हे छोडूंगी नहीं आज मैंने तुम्हें बख्स दिया जाओ जाओ जाओ चले जाओ मेरे जंगल से मुझे अकेला छोड़ दो जाओ मुझे तैयारी करने दो जाओ और फिर रोने लगी वो लोग डर गए यह सब क्या था स्त्री रोने का कारण क्या था!एक आदमी बोला अरे वह कह रही तो थी की मेरा अनाज चुरा लिया और मुझे मार दिया इसका मतलब यह नीरज की बीवी थी जिसे किसी ने अनाज के लिए मार डाला है और वह चुड़ैल बन गयी है! तभी एक दम एक भयानक चेहरा उनके सामने आया तुम लोग अभी तक गए नहीं जाओ यहाँ से वरना मैं तुम्हे भी मार दूंगी!उनके तो होश उड़ गए भागो भागो चुड़ैल-चुड़ैल ऐसा कहते हुए वह गांव पहुंचे सारे के सारे ऐसे हांफ रहे थे!

जिन्दगी मैं इतना कभी नहीं भागे होंगे गांव वालों ने इस तरह उन्हें भागते हुए देखा तो कहने लगे क्या हुआ चुड़ैल-चुड़ैल बके जा रहे हो आगे भी कुछ बोलो अरे तुम्हें बोलने की पडी है हमारी जान पर बनी है!अरे पर हुआ क्या तुम लोग इस तरह क्योँ हांफ रहे हो बताते हैं!बताते हैं पहले सांस तो लेने दो तब उन्होंने गांव वालो को बताया कि नीरज कि बीवी चुड़ैल बन गयी है!और उसने हम से कहा है कि मेरा अनाज किसी ने चुरा कर किसी ने उसे मार के जंगल मैं दफना दिया है!और वह कह रही थी कि अब तुम्हारे गांव मैं कभी पानी नहीं बरसेगा और हर अमावस्या को एक आदमी कि म्रत्यु होगी जब तक उसकी आत्मा को शांति नहीं मिल जाएगी तब तक यूँही वो लोगो को मारती रहेगी!एक आदमी ने पुछा पर नीरज कि बीवी को मारा किसने कुछ लोगो ने कहा पता नहीं कोई तो है इस गांव मैं जिसने यह पाप किया है कि एक हिन्दू औरत को दफना दिया पर जिसने भी यह काम किया है उसकी बजह से सारा गांव मुसीबत मैं पड़ गया है!यह बात सुनकर राजू भी वहां पहुँच गया और सब बातें सुनकर उसके होश उड़ गए और वह घबरा सा गया और कहने लगा वो चुड़ैल कोई और होगी वह चुड़ैल नहीं बन सकती वह तो अनाज लेकर भाग गयी है!कुछ गांव वालों ने कहा वो तो अमवस्या को ही पता चलेगा कि किसने उसकी हत्या कि थी!चलो आने अपने घर जाओ सब लोग जो होगा देखा जायेगा!

राजू के चेहरे पर तो १२ बज ही गए थे और वह भागता हुआ अपनी बीवी के पास पहुंचा और बोला कि हम लोग अब नहीं बचेंगे आज से तीन दिन बाद अमवस्या को वो चुड़ैल हमे मार डालेगी वो बोली तुम पागल तो नहीं हो गए तुम्हारी तबियत तो सही है क्या हो गया है चुड़ैल हमे मार डालेगी कौन चुड़ैल

अरे वही नीरज की बीवी जिसको हमने मार कर जंगल मैं दफना दिया था!क्या हाँ वो सारे गांव वाले कह रहे थे!नीरज ने यह सारी बातें छुप कर सुन ली थी! और अनजान बनकर बोला भइया इतना क्यों डरे हुए हो कौन तुम्हे मार डालेगा राजू अरे नहीं वो तो मैं तुम्हारी भाभी को उस चुड़ैल के बारे में बता रहा था!फिर यह सुनकर नीरज चला गया पर राजू की रातों की नीद खराब हो गयी वह बहुत डरा हुआ था वह सपने मैं भी उस चुड़ैल को देखकर डर जाता था!वो और उसकी पत्नी बहुत परेशान थे उसकी पत्नी सोचती थी कि पहले वो मुझे मारेगी और वो अपनी सोचता था!दोनों ही

डरे हुए थे उन्हें समझ मैं नहीं आ रहा था कि क्या करे !दो दिन ऐसे ही निकल गए तीसरे दिन अमावास थी

सारा गांव डरा हुआ था सब लोग यही बात कर रहे थे पता नहीं आज किसकी मौत है!शाम होते ही सब लोग दरवाजा बंद कर के सो गए रात के बारह बज गए थे सारा गांव जाग रहा था नीरज तो बे फिक्र होके

बाहर ही सो रहा था!गांव वालों को तो उस मनहूश घडी का इंतज़ार था!सारे गांव वाले डरे हुए थे!

कुत्ते भोंक रहे थे पता नहीं कौन सी कयामत आने वाली है!अचानक किसी स्त्री की रोने की आवाज सुनाई दी सारे लोग डर गए वो समझ गए की वो आ चुकी है!नीरज ने देखा कि एक औरत रोते हुए उसकी और आ रही है बाल फिकरे हुए चेहरे पर चांदनी रात मैं उसकी आंखें चमक रही थी!वह पहले तो डरा वह उसके पास आकर बोली तुमने मेरी खबर तक नहीं ली कि मैं कहाँ चली गयी हूँ तुम भी इन गांव वालों की बातो मैं आ गए तुम्हे पता है जब तुम उस दिन बाहर गए थे उस दिन इन लगों ने मुझे मारकर सारा अनाज चुरा लिया था!हाँ मैं जानता था कि कुछ तो जरूर हुआ है पर तुम इस हालत मैं मैंने कभी सोच भी नहीं सकता और तुम मेरे भाई को मारने के लिए यहाँ आई हो जाओ लौट जाओ भगवान् ने चाह तो सब कुछ ठीक हो जायेगा मैं भगवान् से प्रार्थना करूंगा!

वो चिल्लाई नहीं तुम्हे तो मेरे साथ होना चाहिए था तुम भी इन गांव वालों कि तरह बन गएभगवान् क्या ख़ाक ठीक करेगा अब मैं इस गांव को बर्बाद करूंगी और तुम्हे क्या लगता है कि मैं तुम्हारे कहने पर तुम्हारे भाई को छोड़ दूंगी नहीं मैं इस दिन के लिए कितना रोई हूँ और कितना तड्पी हूँ मैं उसे नहीं छोड़ने वाली उन दोनों मैं से एक कि मौत आज ज़रूर है!नीरज नहीं तुम ऐसा नहीं कर सकती तुम मेरे बीच मैं मत आओ नहीं मैं भूल जाऊंगी कि तुम मेरे पति हो हट जाओ!

उसने उसे रोकने की कोशिश कि उसने नीरज को ऐसा धक्का मारा नीरज हवा मैं उडाता हुआ जमीन पर आ गिरा और वह बेहोश हो गया!यह सब राजू की बीवी गेट के छेद से देख रही थी!उस चुड़ैल ने गेट मैं धक्का मारा और उसकी बीवी के बाल पकड़ के बोली चुड़ैल तो तू है तुने मेरा सब कुछ छीन लिया अब तुम्हें नहीं छोडूंगी उसने राजू की बीवी का कलेजा चीर के उसका दिल निकाल लिया हां हा हा हा अब मुझे थोडा सुकून मिलेगा अब की बार तेरी बारी है कहाँ छुपा है तू और हाँ गांव वालो तुम भी कान खोल के सुन लो आने वाली अमावाश को तुम भी नहीं बचोगे सब के सब मरोगे हां हां हां हां बहुत सताया है!

तुम लोगो ने और हँसती हुई जंगल की और चली गयी! सारे गांव वाले बाहर आ गए और नीरज को उठाया और उसे पानी पिला कर होश मैं लाये!उसने अपनी भाभी को मारा हुआ देख वह खूब रोया तब तक राजू भी बाहर आ गया उसने यह सब देख उसकी भी आँखों से आंशू निकल गए सारा गांव रो रहा था! सुबह उसके शव को जलाया सारे गांव वाले राजू से भला बुरा कह रहे थे कि इसकी बजह से हम सब लोग एक दिन ऐसे ही मरेंगे सारे गांव वाले हाँ इसकी ही बजह से हमारे लिए यह मुसीबत खडी हुई है!इसको तो नरक भी नहीं झेलेगा अपने ऐसे भाई के साथ तुने धोका किया है!

तो (दोस्तों यह थी एक अमावास कि रात कि एक चुड़ैल की कहानी अब सुनो आगे की दास्ताँ!कि किस प्रकार उस गांव मैं दुबारा शान्ति आई!) नीरज शांत हो जाओ भगवान् हमारी मदद जरूर करेगा ऐसा तो कोई होगा जिसे हमारी मदद के लिए भगवान् भेजेगा कोई खुदा का नेक बन्दा ही अब हमे बचा सकता है!दोस्तों जब फिल्म मैं विलन होता है! तो एक हीरो का भी होना जरूरी होता है!चाहे वो अजय देवगन हो या सुनील शेट्टी! तो सुनो कहानी का अगला पार्ट अब तो सब लोग बस भगवान् से प्रार्थना करने लगे है भगवन हमे इस मुसीबत से निकालो है प्रभु अब तो हम तुम्हारी शरण मैं है भगवान् तो बस किसी न किसी बहाने से जो लोग भूल उन्हें भूल जाते है उनको याद दिलाते है तभी तो कहते है दुख में सुमिरन सब करैं और दुःख मैं करे न कोय,और जो सुख मैं सुमिरन करे तो दुःख काहे को होय!

तो दोस्तों भगवान् भी बड़े दयालु हे तुरंत छमा भी कर देते है!तो उस गांव मैं किसी की मौत आने से पहले भगवान् ने एक फरिस्ते को उस गांव मैं भेज दिया उसका नाम था विराट वह भगवान् को मानने वाला एक नेक बन्दा था!वह किसी काम से वहां से गुजर रहा था! रात होने वाली थी इसलिए उसने सोचा की क्योँ न मैं रात भर यहीं ठहर जाऊं!वह उस गांव कि और चल दिया कमर मैं तलवार लटकाए हुए राजाओं जैसे कपडे पहने हुए वह पहुंचा गांव मैं अजनबी को देख कर कुछ लोगो ने पुछा कि तुम कौन हो कहाँ से आये हो उसने कहा कि मैं विराट हूँ और किसी काम से यहाँ से गुजर रहा था रात होने वाली है तो सोचा क्योँ न मैं यहाँ रात भर रुक जाऊं एक गांव वाले ने पूछ अच्छा तुम ही वो विराट हो जिसे लोग भगवान् का भेजा हुआ फरिस्ता कहते हैं!उसने कहा हाँ कुछ लोग कहते हैं!

सब लोग उसके पैरों मैं गिर पड़े भगवान् ने हमारी सुन ली तुम जैसे फरिस्ते को भेज दिया हमे बचा लो विराट हमे बचा लो हमे उस चुड़ैल से बचा लो तुम्ही हो जो हमारी मदद कर सकते हैं!विराट अरे यह क्या कर रहे हो पहले खड़े हो जाओ फिर सब खड़े हो गए अब बताओ बात क्या है तुम इतने घबराए हुए क्योँ लग रहे हो अरे गांव अमिन एक चुड़ैल हम सबको मार डालेगी अरे मैं आ गया हूँ ना सब कुछ ठीक हो जायेगा आओ सारे बताओ मुझे क्या हुआ है तब गांव वालो ने सब कुछ बता दिया और राजू और नीरज को बुलाया और कहा राजू तुमसे जो लालच मैं जो कुछ हुआ बुरा हुआ उसे तुम भूल जाओ और हमारा साथ देकर इस गांव को बचाओ और नीरज तुम अपने बड़े भाई को माफ़ कर दो नीरज मैं तो भाई से कभी गुस्सा भी नहीं हुआ मगर आप लोगों को लगता है कि मैं गुस्सा हूँ तो भाई मुझे माफ़ कर देना और उसने राजू के पैर छु लिए राजू ने उसे उठाकर गले लगा लिया दोनो की आँखों से आंशू निकल रहे थे!

तब विराट ने कहा हमारे पास कल का वक़्त है और परसों अमावास है तुम लोगो को किस किस चीज का इंतजाम करना है!मैं बताऊँगा अब आप लोग निडर होके अपने घरों मैं सो जाइये सुबह मैं सबको बता दूंगा!विराट को गांव वालों ने बढ़िया पकवान मिठाइयाँ और खूब मेहमान नमाजी की और बढ़िया बिस्तर पर सुलाया सुबह होकर विराट ने सब गांव वालो को इकट्ठा होने को कहा थोड़ी देर मैं सारा गांव इकठ्ठा हो गया तब उसने सबको बताया हम सबको मिलकर उस चुड़ैल को मारना होगा!मैं सब को बताता हूँ हमे क्या करना है!

कल रात पूरे गांव मैं उजाला होना चाहिए कोई भी घर बिन उजाले के नहीं होना चाहिए पूरे गांव को दीपावली की तरह सजा दो और सब लोग घर से बाहर होने चहिये मेरी नजरों के सामने और राजू तुम अपने घर मैं हवन की सामग्री के साथ वहां बैठोगे मैं यहाँ से मंत्र पढूंगा और तुम आहूति दोगे और नीरज तुम जंगल मैं दो लोगो के साथ उस चुड़ैल की कब्र को खोद कर उसके शरीर को जलना होगा मैं तुम्हे कल सुबह यहीं मिलूंगा अब सब लोग तैयारी करो!उस दिन की रात कब बीते सबको यही इंतज़ार था!सुबह होते ही विराट ने सब गांव वालो को इकट्ठा किया और कहा तैयारी हो चुकी हैं गांव वाले हाँ हमने अपने घर मैं खूब सारे दीपक तैयार कर के रख दिए हैं!सारी तैयारी हो गयी हैं!

शाम होते ही उसने नीरज से कहा तुम दो लोग लेकर यह लो अभमंत्रित नीबू यह तुम्हें वह कब्र कहाँ है यह बताएगा यह जहाँ भी लाल हो जाये वही उसकी कब्र है!और यह लो लहशुन की मालायें अपने-अपने गले मैं डाल लो इससे वो तुम्हें छू भी नहीं पाएगी चाहे वो कुछ भी करे तुम डरना मत वो किसी भी तरह तुमसे इस माला को उतारने की कोशिश करेगी पर तुम यह गलती मत करना वरना वो तुम्हें मार देगी अब तुम लोग जाओ अपना ध्यान रखना वो लोग फावड़े उठाकर जंगल की और चले गए इधर सब लोग इकट्ठे होकर बैठे उस चुड़ैल का इंतज़ार कर रहे थे!

उधर राजू अपना आशन लगाये हुए हवन पर बैठा था!रात के बारह बज रहे थे कि किसी के पैरों कि आहट सुनाई दी सब लोग उधर देखने लगे तो क्या देखते हैं कि बाल फिकरे हुए सफ़ेद साडी मैं एक औरत चली आ रही है!उसने गांव मैं रात रोशनी देख वह रुकी और फिर आगे बढ़ी उसने देखा कि सारे गांव वाले बाहर बेठे हैं जैसे कि उन्हें बिलकुल डर नहीं किसी बात का वह जोर से चिल्लाई अरे मूर्खो मरने कि इतनी जल्दी है हा हा हा हा तो यह लो उसने जोर से हवा चलाई कि सारे दीपक बुझ गए सारे गांव मैं अँधेरा हो गया सारे लोग डरने लगे वह कभी इधर धिखे कभी उधर हा हा हा हा हा अब तुम सब लोग मरोगे ऐसा होते देख विराट ने कहा रुक जाओ इन गांव वालो को छोड़ मुझ से लड़ इनसे मैंने कहा था यह सब करने को चुड़ैल बोली तू कौन है! 

वह बोला मेरा नाम विराट है और तुम किसी को बिना नुकसान किये हुए यहाँ से चली जाओ वरना मुझे तुम्हे मारना पड़ेगा चुड़ैल तू मुझे मरेगा हा हा हा हा हा यह मुझे मरेगा यह ले उसने उसको अपनी शक्ति से बहुत दूर फ़ैंक दिया और वह दीवार से जा टकराया विराट आ आ आ मेरा सर लगता हे इसे सबक सीखन ही पड़ेगा उसने अपनी तलवार निकाली और उस पर हमला कर दिया वह एकदम गायब हो गयी उसका वार खाली निकल गया अब वो गायब हो गयी बस आवाज सुनाई दे रही थी!

विराट ने भगवान् से प्रार्थना की और आंखें खोली अब उसे वह चुड़ैल दिखाई देने लगी उसने अपने अपनी तलवार से उसके चोट पहुंचा दी अब वह अपने को हारता देख वह राजू की और लपकी विराट ने मंत्र पढना शुरू किये है प्रभु मैं अपने पापो को कबूल करता हूँ मुझे माफ़ कर दो मैं आगे से कभी ऐसी भूल नहीं करूंगा यही राजू दोहरा रहा था!और वह हवन मैं आहूति दे रहा था!

वह उसके ऊपर लपकी उस से पहले ही विराट ने अपनी तलवार निकाली और उसके पेट मैं घुसेड दी तलवार उसके पेट को चीरते हुए पार निकल गयी वो चिल्लाई आ आ आ वो भागती हुयी जंगल की और चली गयी उधर नीरज और उसके दोस्तों को वो कब्र मिल गयी वो उसे खोद ही रहे थे कि उन्हें किसी के चिल्लाने की आवाज आई वो समझ गए की चुड़ैल आ रही उनके खोदने की स्पीड बढाई और उस की लाश को निकाला वो उस लाश को निकाल पाए ही थे!की वह वहां आ पहुँची वो उन पर झपटी जैसे ही उसने उन पर हमला करना चाहा वह चीख कर ददोर जा गिरी वह लहसुन को देख कर दूर से ही चिल्लाये जा रही थी!

उसे मत छुओं उसे मत जलाओ तब तक विराट भी उसका पीछा करते हुए वहां आ पहुंचा उसने कहा जल्दी से इस शरीर को जला दो उनके तो हाथ काँप रहे थे माचिस भी नहीं जल रही थी और वह चिल्लाये नहीं नहीं नहीं जा रही थी नहीं मुझे छोड़ दो उसे मत जलाओ मच्चिस जलते ही उसने उसमें आग लगा दी शरीर जलने लगा और वह भी जलने लगी वो आ आ आ आ नहीं मुझे छोड़ दो मुझ पर रहम करो आ आ आ आ आ आ आ आ और वह राख के ढेर मैं परवर्तित हो गयी विराट ने उन तीनो को शाबासी दी और वह गांव वापस आ गए सारे गांव वाले अब बहुत खुश थे! सब ने विराट का धन्यवाद किया सुबह होते ही विराट ने कहा अब मुझे चलना चाहिए सब गांव वालो की आँखों में आंशु आ गए!और सब को राम-राम कर के विराट आगे बढ़ गया ।।





मंगलवार, 1 जून 2021

जून 01, 2021

Horror Story in Hindi - जंगल की चुडैल ||Hindi Stories Blog

 


एक दिन की बात हैं , ठंड का समय था घना कोहरा छाया था सारे लोग जल्दी कार्यालय का काम ख़त्म करके घर की तरफ निकल रहे थे ! नाना जी उस समय के बड़े अधिकारियों मे से एक थे ! वे उस समय के उच्च वर्ग के लोगों मे एक अमीन का काम करते थे ! रोज की तरह ही उस दिन कम ख़त्म होने के बाद घर के लिए अपनी गाड़ी से रवाना होने लगे ! रास्‍ते में उन्हे हाट से कुछ समान भी लेना था तो वे और साथियों से अलग हो गये ! उन्होने घर की कुछ जरूरत के समान लिए और गाड़ी आगे बढ़ा दी !

आगे जाने पर उन्हे कुछ मछली बाज़ार दिखा और वे मछली खरीदने के लिए रुक गये ! ताज़ी मछलियाँ लेने और देखने मे टाइम ज़्यादा ही गुजर गया ! उनकी जब अपनी घड़ी पर नज़र गई तो उन्हे आभास हुआ की आज तो घर जाने मे बहुत देर हो जाएगी और ये सब लेकर घर पहुचने मे काफ़ी समय लग जाएगा ! फिर यही सब सोच कर उन्होने सोचा कि क्यू ना जंगल के रास्ते से निकला जाए तो जल्दी पहुँच जाउँगा ! तो उन्होने अपना रास्ता बदला और जंगल की तरफ़ अपनी गाड़ी को घुमा लिया !

समय ११ बज चुका था गाड़ी तेज रफ़्तार से आगे बढ़ रहां था तभी अचनाक तेज ब्रेक के साथ गाड़ी को रोकना पड़ा !

उनकी गाड़ी के आगे एक औरतज़ोर २ से रो रही थी!

उन्होने सोचा इस वीराने मे ये औरत क्या कर रही हैं उन्हे लगा की कोई मजदूर की पत्नी होगी जो नाराज़ होकर घर छोड कर जॅंगल मे भाग आई हैं तो उन्होने उससे पूछा की यहाँ जॅंगल मे तुम क्या कर रही हो?

                  

लकिन उसने कोई जवाब न देकर और ज़ोर २ से रोने लगी!

सारे जंगल मे उसकी हूँ हूँ सी सिसकियाँ गूँज रही थी!

फिर नाना जी ने पूछा तुम्हारा घर कहाँ हैं?

लेकिन वो कुछ भी ना बोली!

तब नाना जी ने कहा की आज चलो मेरे घर मे रहना सुबह अपने घर चली जाना ये जॅंगल बहुत

सारे जंगली जानवर से भरा हे रात भर यहाँ मत रूको चलो आज मेरे घर मे सब के लिए खाना बना देना और कल सुबह अपने घर चली जाना ! उसने ये सुना तो झट से तैयार हो गई ! और गाड़ी मे पीछे की सीट पर बैठ गई!

सिर मे बड़ा सा घूँघट डालने की वजह से उसका चेहरा छिपा हुआ था ! कुछ ही देर मे गाड़ी घर के दरवाजे पे थी! घर के लोग कब से उनकी राह देख रहे थे !

गाड़ी रुकते ही पापा ने पूछा आज तो बहुत देर हो गई और सारे लोग आ भी चुके हैं ! तब उन्होने सारी बातें अपनी माँ को बताई और कहा की आज खाना इससे बनवा लो कल सुबह ये अपने घर चली जाएगी!

इतनी रात को बेचारी जंगल मे कहा भटकती ! इसलिए मैं ले आया !

पर पापा को कुछ संदेह हो रहा था की कहीं चोर तो नहीं हे रात को सोने के बाद या खाना बनाते समय कहीं घर के सामान ही चुरा कर ना ले जाए!

पर बेटे की बात को कैसे माना करती !

उन्होने उस औरत को कहा देखो आज तो मैं रख ले रही हूँ लेकिन कल सुबह होते ही यहाँ से चली जाना!

और जाओ रसोई मे ये समान उठा कर ले जाओ और खाना बना दो !

उसने फिर से जवाब नहीं दिया !

बस हूँ हूँ हूँ की आवाज बाहर आयी !

और वो सारा सामान लेकर माँ के पी छे बहुत दूर चल दी!

रसोई मे सारा सामान रखवा कर माता जी ने उसे खाना जल्दी बनाने की सख्‍त हिदायत दी!

और वहाँ से चली गई !

लेकिन उनका मन कुछ परेसान सा था !

फिर १० मिनट मे रसोरे मे उसे देखने चली गई की वो क्या कर रही हे और उसका चेहर भी देखना चाहती थी!

                  

लेकिन .....................................................................

वहाँ पहुची तो देखा की वो मछलियों का थैला निकल रही थी!

उन्होने बहुत ज़ोर से गुस्से मे कहा यहाँ सब खाने का इंतजार कर रहे हे और तुम अभी तक मछलियाँ ही निकल रही हो कल सुबह तक बनाओगी क्या?

उसके सिर पर घूँघट अभी भी था तो चेहरा देखना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था !

उन्होने उससे कहा तुम जल्दी से खाने की तैयारी करो मैं आग सुलगा देती हूँ काम जल्दी हो जाएगा !

और वे जल्दी से चूल्हा जलाने की तैयारिया करने लगी !

लेकिन साथ ही वो उसका चेहरा देखने की भी कोशिश कर रही थी !

लेकिन वो जितना देखने की कोशिश करती वो और पल्लू खींच लेती! अंत मे हार कर वे बोली देखो मैने आग सुलगा दी हैं अब आगे सारा काम कर लो !

कुछ ज़रूरत हो तो बुला लेना ! लेकिन वो फिर कुछ नहीं बोली ! अब उन्हें लगा की यहाँ से जाने मे ही ठीक हैं ! वरना मेरा भी समय खराब होगा और हो सकता हैं अंजान लोगों से डर रही हो !

ये सब सोच कर उन्होंने उसे कहा की मैं आ रही हूँ जल्दी से खाना बना कर रखना !

और वहाँ से निकल गई !

मन अभी तक परेसांन ही था !

कभी अपने कमरे कभी बच्चों के कभी बाहर सब को देख रही थी, कहीं कुछ अनहोनी ना हो जाए!

एक मिनट भी आराम से नहीं बैठ पाई !

अभी पाँच मिनट ही हुए थे पर उनके लिए वो घड़ी पहाड़ सी हो रही थी !

समय बीत ही नहीं रहा था !

आठ मिनट बड़ी मुश्किल से गुज़रे और वे तुरंत ही कुछ सोच कर रसोरे की तरफ दौड़ी !

और वहाँ पहुँच कर आया

जैसे ही उन्होने रसोई घर का नज़ारा देखा , उनकी आँखे फटी की फटी रह गई ! उनके पैर बिल्कुल ही जम गये ना उनसे आगे जाया जा रहा था ना ही पीछे !

उनके हृदय की धडकने रुक रही थी !

वो औरत रसोरे मे बैठ कर सारी कच्ची मछलिया खा रही थी !

सारे रसोरे में मछलियाँ और खून बिखरा पड़ा था !

उसके सिर से घूँघट भी उतरा पड़ा था !

इतना खौफनाक चेहरा आज तक उन्होने नहीं देखा था !

बाल, नाख़ून सब बढ़े हुए थे !

मछलियाँ खाने मे मगन होने की वजह से उसे कुछ ध्यान भी नहीं था !

और खुशी से कभी २ वो आवाज़े भी निकल रही थी !

हूँ हूँ सी आवाज़े गूँज रही थी !

रसोरा पिछवारे मे होने की वजह से और लोगों का ध्यान भी इधर नही आ रहा था !

माँ को भी कुछ नहीं समझ आ रहा था , कि चिल्लाने से कहीं घर के लोगों को नुकसान ना पहुचाए !

वो चुड़ैल से अपने घर को कैसे बचाए उन्हे समझ नहीं आ रहा था !

बस भगवान का नाम ही उनके दिमाग़ मे आ रहा था !

अचानक वे आगे बढ़ने लगी उसकी तरफ !

और झट से एक थाल लिया और चूल्‍हे की तरफ दौड़ी ! उस चुरैल की नज़र भी पापा पर पड़ चुकी थी सो वो भी कुछ सोच कर उठी अपनी जगह से !

माँ कुछ भी देर नहीं करना चाहती थी , उन्हे पता था की आज अगर ज़रा सी भी लापरवाही हुई तो अनहोनी हो जाएगी !

                   

उस चुरैल के कुछ करने से पहले ही उन्हे चूल्‍हे तक पहुचना था !

और चूल्‍हे के पास पहुँच कर उन्होने जलता हुआ कोयला थाल मे भर लिया !

और चुड़ैल की तरफ लेकर जोर से फेंका !

आग की जलन की वजह से वो अजीब सी डरावनी आवाज़े निकालने लगी !

अब तो उसकी आवाज़े बाहर भी जा रही थी सारे लोग बाहरसे रसोरे की तरफ भागे !

वो चुड़ैल ज़ोर से हूँ हूँ जोर की आवाज़ निकल रही थी और पूरे रसोरे मे दौड़ रही थी और माता जी को पकड़ना भी चाह रही थी !

लेकिन अब सारे लग रसोरे मे आ चुके थे काफी लोगों की भीड़ देख कर वो और भी डर गयी थी !

लोंगों की भीड़ को थेलती हुई वो बाहर जॅंगल की तरफ भाग गये

और सारे लोग ये मंज़र देख कर डरे साहमे से खड़े थे ! और मन हीं मन माता जी की हिम्मत की दाद दे रहे थे

तो ऐसे छूटा चुरैल से पीछा !


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सोमवार, 31 मई 2021

मई 31, 2021

Horror Story in Hindi - खौफ। ||Hindi Stories Blog

 


शाम ढल रही थी | आसमान पुरा काला पड चुका था जैसे किसी ने काले रंग की शीशी उडेल दि हो | शायद बारिश आने को बेकरार है |,

 घिरा हुआ आसमान और ठंडी हवाये चाँदनी को बेहद पसंद थी | बारिश चाँदनी के बदन में एक अजब सी सिहरन पैदा करती थी |

 चाँदनी आईने के सामने पिछले आधे घंटे से बन-सवर रही थी | बन-सवर क्या ? सजने की रिहर्सल कर रही थी |

 तीन बार तो साडीयाँ चेन्ज कर चुकी थी | चाँदनी को साज-श्रुंगार का बहुत शौक था आज उसे मिसीस कपूर की बेटी की शादी में जाना था |


 चाँदनी कॉलेज की अध्यापक थी मगर दिखती कॉलेज स्टुडन्ट जैसी ! वो हमेशा खूबसूरत दिखना और खूबसूरत रहना चाहती थी |

चाँदनी अब तैयार होकर रवाना हि हो रही थी उसके नजर अखबार पर पड़ी | उसमें कोई भैरव चौक की खबर थी |

 लिखा था की भैरव चौक नाम के एक छोटे से इलाके में बहुत सारी अजीबो-गरीब घटनाएं घटी है |


कितनी वारदातें हुई है लूट-मार, हत्या, अपहरण, बलात्कार, भूत-प्रेत का साया, सभी घटनाएं वही तो घटी है लोग वहाँ दिन के उजाले में भी जाने का साहस नहीं करते थे |

 ये खबर पढते ही थोडे समय पहले चाँदनी का चमकता चहेरा फिका पड गया उसके चहरे पर मानो हलका खौफ मंडरा रहा हो !

थोडी देर वो खामोश होकर वही खडी रही मानो ये खबर उसके मन में घर कर गई हो ! चाँदनी की खामोशी मिसीस कपूर के फोन ने तोडी |

 चाँदनी ने फोन उठाया और बातें करते वहाँ से कार में निकल गई | चाँदनी को शादी में पहुँचने में कोई दिक्कत नहीं आई |


चाँदनी ने गाडी से बाहर निकलने से पहले एक बार फिर अपना चेहरा निखार लिया था | चाँदनी का स्वागत हँसते चहेरो ने किया |

मगर कुछ चहेरे ऐसे भी थे जिसने चाँदनी को बुरी नियत से देखा | वो चहेरे थे कॉलेज के बदमाश और कॉलेज ट्रस्टी के बीगडे हुए लडके !

कॉलेज ऊन लडको को पाँच पापी बुलाती थी | लडकीयो को छेड़ना, लडकीयो के साथ बद-तमीजी करना, लड़ना-झघडना

 वो सब उन पांचो को काम था इसलिए कॉलेज उसे पाँच पापी बुलाती थी | खैर ! चाँदनी भी उनकी हरकतों को भलीभाती जानती थी


 इसलिए उसको अनदेखा करके शादी में शामिल हो गई | नाच-गाना, खाना-पीना, गप्पे लडाने और बिदाई में पता हि नहीं चला के ......

 रात के 11 बज गये है | उसे घर पहुँचने में अभी उसे 2 घंटो का फासला तय करना था | चाँदनी के पति जतीन का फ़ोन आता था |

 ‘हेल्लो चाँदनी ? कहा हो ?’ – जतीन ने कहा | ‘में शादी में आई थी पर बहुत देर हो गई है



 बस मिसीस माथुर के साथ अब निकल ही रही हुं’ – चाँदनी ने बातें खतम करके फोन रखा |

 चाँदनी ने फटाफट से मिसीस कपुर बाय किया और मिसीस माथुर को ढुंढने लगी मगर पता चला की मिसीस माथुर तो घर के लिए कब की रवाना हो चुकी है |

 चाँदनी सोचने लगती है की अब अकेली घर कैसे जायेगी ? तभी अचानक से तेज बिजली कडकी ...सायद थोडे समय के बाद बारिश होने वाली है

  उसने किसी परवा करे बिना वहाँ से अकेली निकल पड़ी मगर वो पाँच पापी चाँदनी की हर हरकत नजर रखे हुए थे |

चाँदनी ने बस थोड़ा सा हि फासला तय किया हि था की बारिश की बुंदाबारी आने लगी |

चाँदनी मन हि मन सोच रही थी की वो बारिश बंद होने का इन्तजार करे ? या फीर आगे बढे ?


 चाँदनी को जल्द हि तय करना था उसे क्या करना है ? उसने आगे बढ़ने का फैसला किया |

 चाँदनी की कार थोडी आगे बढी ही थी की तेज बारिश शरु हो गई | हमेशा चाँदनी को सिहरन देने वाली बारिश की बुंदे आज बाधा बन रही थी |

 चाँदनी बारिश की बुंदोबारी को चीरती आगे बढ़ रही थी | चाँदनी का आगे बढ़ने का फैसला सही था क्योंकि बारिश बंद हो चुकी थी |

चाँदनी हलके मन से ड्राईव कर रही थी मगर ...लगता है आज का दिन चाँदनी के लिए सच-मुच भारी था क्योंकि सामने ट्राफीक जाम था |

 गाडीयों की लम्बी लाईन लगी थी | किसी से पूछा तो पता चला की भारी बारिश के चलते आगे का रास्ता पुरा ब्लॉक हो चुका है |

 जब तक रास्ता साफ नहीं होगा तब तक ट्राफिक जाम रहेगा और रास्ता साफ होने में सुबह भी हो सकती है |


सुबह का नाम सुनते हि चाँदनी की हवाईयाँ उड लगी | तभी चाँदनी देखती है की कुछ गाडीया कच्ची सड़क की तरफ़ जा रही है |

 ‘भैया ये कच्ची सड़क कहा जाती है ?’ – चाँदनी ने किसी से पुछा | ‘ये कच्ची सड़क शहर जाती है बहन जी’

 चाँदनी फिर से सोचने लगी की वो रास्ता खुलने का इन्तजार करे या फिर कच्चे रास्ते से जाये ?

 उसने सोचा की वो कब तक अकेली रास्ता साफ होने का इन्तजार करेंगी ? वो भी कच्ची सड़क की तरफ़ जा रही गाडियां के साथ गाडी चला कर शहर वाले रास्ते जा सकती है,

 इसलिए उसने वो कच्ची सड़क से घर जाने का फैसला किया | चाँदनी आगे बढ़ तो रही थी मगर खौफ़ अभी भी उसके सीर पर डर मंडरा रहा था

 क्योंकि वो आगे चल रही गाडियां के सहारे जा रही थी जैसे कोई दीपक की रोशनी लेकर अंधेरे से गुजर रहा हो !,

 आगे चल गाडीयो की रफ्तार तेज होती है वो सब चाँदनी की कार से आगे बढ़ जाती है |


 इतनी बढ जाती है की वो सब कारे हेडलाईट के सहारे देखी जा सकती थी | चाँदनी भी उन तक पहुंचने के लिए अपनी गाडी की स्पीड बढाती है मगर .... गाडी अचानक से बंद हो जाती है |

 गाडी बंद होते हि चाँदनी बदहवास सी हो जाती है | वो वहाँ अकेली थी आगे पीछे कोई नहीं था |,

 आगे जाती गाडीयाँ एक के बाद एक आंखो से ओझल हो रही थी | चाँदनी अब बेचेन सी होने लगी थी | धडकने तेज चल रही थी |

 उसके माथे से डर की बुंदे एक के बाद टपकने लगी थी उसके आंखो में खौफ साफ़ दिख रहा था | वो गभराके जोर-जोर से सांसे ले रही थी |

 उसने अपने पर्स से फोन निकाला और जतीन का नंबर डायल करने लगी मगर वहाँ मोबाइल कनेशन के नाम पर कुछ नहीं था |



 वो इतना डर गई थी की वो गाडी से बाहर निकलना भी नहीं चाहती थी | उसे कुछ सूझ नहीं था बस गाडी स्टार्ट करने में लगी थी

 वो बार बार चाबी को डाए-बाए घुमा रही थी मगर नतिजा वही गाडी स्टार्ट नहीं हो रही थी | अचानक से चाँदनी की नजर उसके पर्स में जाती है

 और उसमें एक तवीज दिखता है वो तवीज जो चाँदनी की माँ ने आखरी सांस लेते वक्त दिया था और कहा था की 'ये तवीज बुरे वक्त में तुम्हारी हिफाजत करेगा' |

चाँदनी ने तुरंत तवीज लिया और आँखें बंद करके फ़िर से गाडी स्टार्ट करने की कोशिश करने लगी |

माँ का दिया तवीज काम कर गया था गाडी एक झटके में स्टार्ट हो गई थी | चाँदनी के तो जान में जान आई हो ऐसे राहत की सांस ली |

 चाँदनी तवीज की शक्ती से अचंभित हो गई | वह समय व्यर्थ किये बिना वहाँ से चल दी |

 चाँदनी एकादा किलोमीटर का रास्ता काटा था वहाँ उसे एक बोर्ड दिखता है उसे बोर्ड पे लिखा था .भैरव चौक .!

 भैरव चौक नाम पढते ही रौगटें खड़े हो गये और आँखें खुली की खुली रह गई उसकी सांसे फिर से तेज रफ्तार से बढ़ने लगी |

 वही भैरव चौक जिसके बारे चाँदनी्ने पढा था जहाँ पर खुन, बलात्कार जैसे वारदातें हुई थी |

 उसने फ़िर से तवीज को हाथ में थामा और एक पल के लिए आँखें बंद की जैसे वो भगवान से दुआ मांग रही हो के अब की बार गाडी बंद ना हो !

 मगर . ये क्या ? चाँदनी की कार भैरव चौक के नाम के बोर्ड के ठिक सामने आ कर रुक गई |


 चाँदनी ने बाहर का नजारा देखा तो वो बेहद अँधेरा और डरावना था | जुगनु की टमटमाटी रोशनी के सीवाँ कुछ दिखाई नहीं दे रहा था |

 चाँदनी ने फिर से तवीज उठाया और आँखें बंद कर के भगवान का नाम लेती हुई गाडी स्टार्ट करने में जुट गई |

 गाडी के चाबी को डाई-बाई घुमाकर उसकी उंगलीया तक थक गई थी मगर अब की बार गाडी शुरू होने का नाम ही नहीं ले रही थी |

 एक दो बार फोन भी लगाया मगर वहाँ भी उसे नाकामीयबी मिली वो इतनी डरी हुई थी की गाडी से बाहर निकलने में भी उसके पैर कांप रहे थे |


 तभी ..उसे सामने कुछ दिखा .. सामने से सफेद रंग की कुछ धुंधली-धुंधली आकृति आ रही थी |,

 चाँदनी उसे देख दहल गई और बदन में कंपकंपी होने लगी | वो आकृति जैसे-जैसे आगे आ रही थी वैसे-वैसे एक आकृति से तीन आकृतियाँ हो गई थी |

 काले घने अंधेरे में सफेद रंग साफ-साफ दिख रहा था | चाँदनी उसे देख बस सोच रही थी ये क्या आ रहा है ? सफेद चादर ओढे कोई आदमी ?

 या फ़िर कोई भूत-प्रेत.. ? चाँदनी के पसीने छुटने लगे थे | चाँदनी ने जल्दी से गाडी के शीशे बंद है की नही ये तसल्ली कर ली और वहाँ बैठे-बैठे तवीज को थामे आंखे बंद करके भगवान का नाम जपने लगी |

 अब वो आकृतियाँ चाँदनी के गाडी के आगे पीछे मंडराने लगी थी | सहमी हुई चाँदनी जोर-जोर सांसे लेकर, हलकी सी कनकियों से देख रही थी |

 तभी किसी ने गाडी के शीशे पर जोरदार वार किया | चाँदनी उस तरफ देखा तो मालुम पडा के वो गाडी के शीशे तोडने की कोशीश कर रहे थे |

 चाँदनी गभराके जोर-जोर से चील्लाने लगी - ‘बचाओ , बचाओ !’ चाँदनी चिल्लाती रही और वो शीशे पर वार करते रहे और एक शीशा तोड़ दिया |

  शीशे टुटते ही चाँदनी को कही से मदद मिल जाये इसलिए वो जोर से चिल्लाने लगी - ‘बचाओ, कोई मुझे बचाओ !!’

 किसी ने गाडी का दरवाजा खोल दिया और चाँदनी का हाथ पकद के गाडी से एक झटके में बाहर फ़ेक दिया |

 चाँदनी गाडी से बाहर गीरकर एक पत्थर से आ टकराई | चाँदनी मानो अधमरी सी हो गई थी

 उसने हिम्मत जुटाई और वहाँ से उठ खड़ी हो गई तो उसने देखा के वहाँ तीन सफेद चादर ओढे तीन शख्स थे |

 वो तीनो के चहरे काले, दहशतभरे और भयानक थे और सब हाथ में चक्कू लेकर खड़े थे |

 चाँदनी समझ गई के ये सब लुटेरे है और बिना कुछ बोलें चाँदनी ने सोने-चांदी के जेवर निकालने लगी |



 ‘ये सब ले लो मगर मुझे जाने दो’ – चाँदनी से बिलकते हुई उन लुटेरो से कहा |

 एक लुटेरे ने तुरंत चाँदनी के हाथों से सब जेवर छीन लिए | चाँदनी अभी भी बिकल-बिलक कर बस रोये जा रही थी |

 ‘ये सब तो हम लेंगे ही मगर इतनी लूट काफ़ी नहीं हमारे लिए’ – एक लूटेरे ने चाँदनी के उपर हवस भरी नजर डालते कहा |

 चाँदनी लूटेरो का इरादा समज गई थी और एक सांस लेकर वहाँ से भागी | वो तीनो भी चाँदनी के पीछे भागे |

 मगर सहमी हुई चाँदनी कितने तक भाग पाती ? उन तीनो भैडीये ने आखिरकार चाँदनी को पकद ही लिया |

 ‘बचाओ . बचाओ !’ – चाँदनी पुरी ताकत से चिल्लाई | ‘यहाँ तुम्हें बचानेवाले कोई नहीं आयेगा !


 चिल्लाओ जीतना चिल्लाना हो ऊतना’ – एक लुटेरे ने हँसते हुए कहा | तभी एक लुटेरे पर पिछे से तेज वार होता है | वो लुटेरा वही ढेर हो जाता है |

 चाँदनी को एक आशा की किरण दिखाई देती है | वो दोनो लुटेरे पीछे देखते है की ये वार किसने किया ?

 चाँदनी भी उस तरफ देखती जहाँ से वार हुआ था | वहाँ वो कॉलेज के पांच स्टुडन्ट होते है जीसे कॉलेज पाँच पापी कहके बुलाती थी |

 वो पाँच स्टूडन्ट बचे दो लुटेरे पर झपते है उन्हे मार मारके बेहोश कर देते है | चाँदनी वहाँ सहमी खडी आंखो से आंसु बरसाती बस देखती रही थी

 और सोच रही थी की जिस पाँच पापी को बुरा और गलत समज रही थी वही लोगो ने आज चाँदनी को बुरे हादसे से बचा रहे थे |

 ‘मेडम हम बुरे है मगर इज्जत सब की करते है आप बेफ़िकर होकर जाईये |



 ये बंटी आप को सुरक्षित घर तक छोड़ देगा और हम इन लुटेरो को पुलिस के हवाले कर देगें इन लोगो ने भूत-प्रेत के नाम पर बहुत लूट मचा रखी थी

 अब पुलिस इन्हे मजा चखायेगी – एक स्टुडन्ट ने कहा | ‘मुझे माफ कर देना ! मै तुम लोग को गलत समज नहीं थी मगर तुम ....’

 इन से आगे चाँदनी के मुँह से एक शब्द भी निकल नहीं पाये चाँदनी के आंसु ही थे जो सारी बातें बयां कर रहे थे |

 चाँदनी वहाँ से सुरक्षित होकर घर गई |


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